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पुलिस महकमे में धोखाधड़ी: 10वीं की नकली मार्कशीट से बना आरक्षक, 14 साल बाद हुआ खुलासा; फर्जी दस्तावेजों से पाया था पद
उज्जैन लाइव, उज्जैन, श्रुति घुरैया:
एक शातिर युवक ने धोखाधड़ी की सारी हदें पार करते हुए पुलिस महकमे में नौकरी पाने के लिए एक फर्जी कक्षा 10वीं की मार्कशीट पेश की और 14 वर्षों तक आरक्षक के पद पर काम करता रहा। यह घटना तब सामने आई जब एक शिकायत के बाद विभागीय जांच शुरू हुई और इस आरोपी का चेहरा बेनकाब हो गया।
दरअसल, 33 वर्षीय अजहरुद्दीन फारुखी ने पुलिस में अनुकंपा नियुक्ति पाने के लिए कक्षा 10वीं की फर्जी मार्कशीट का सहारा लिया था। अजहरुद्दीन के पिता शफीउद्दीन प्रधान आरक्षक थे, जिनके निधन के बाद उसने कक्षा 10वीं की जो अंकसूची प्रस्तुत की, उसे आधार बनाकर उसे नौकरी मिल गई। 14 साल तक पुलिस के विभिन्न थानों में काम करते हुए, वह अपने खेल को जारी रखे हुए था, लेकिन एक दिन उसकी धोखाधड़ी का पर्दाफाश हो गया।
अजहरुद्दीन ने किसी भी सामान्य नौकरी की तरह ही पुलिस अधीक्षक कार्यालय में अपने दस्तावेज पेश किए, लेकिन इन दस्तावेजों के बीच एक चीज जो सामान्य नहीं थी, वह थी उसकी कक्षा 10वीं की फर्जी मार्कशीट। इस मार्कशीट को उसने गुना के एक स्कूल से तैयार किया था, जिसका नाम था एमएम सेकंडरी स्कूल।
कहानी और भी नाटकीय हो गई जब जांच के दौरान पता चला कि इस नाम से न तो बोर्ड ऑफ हायर सेकंडरी एजुकेशन दिल्ली से कोई मार्कशीट जारी की गई थी, और न ही गुना के एमएम स्कूल से। स्कूल प्रशासन ने स्पष्ट किया कि उनकी मान्यता भी रद्द हो चुकी थी और इस तरह की कोई भी मार्कशीट वहां से जारी नहीं की गई थी। असल में, अजहरुद्दीन ने एक पूरी तरह से नकली मार्कशीट तैयार करवाई थी और धोखाधड़ी से नौकरी प्राप्त कर ली थी।
2016 में, जब एक शिकायतकर्ता ने उसकी मार्कशीट की सच्चाई को उजागर किया, तो विभागीय जांच शुरू की गई। जांच में यह साबित हो गया कि अजहरुद्दीन ने पूरी तरह से धोखाधड़ी की थी। जांच रिपोर्ट के आधार पर, पुलिस अधीक्षक प्रदीप शर्मा ने उसे आरक्षक के पद से बर्खास्त कर दिया और उसके खिलाफ धोखाधड़ी, कूटरचना, और अन्य धाराओं में मामला दर्ज करने का आदेश दिया।
माधवनगर थाना पुलिस ने अजहरुद्दीन के खिलाफ धोखाधड़ी, कूटरचना, और फर्जी दस्तावेज तैयार करने का मामला दर्ज किया है। पुलिस का कहना है कि जल्द ही उसे गिरफ्तार कर लिया जाएगा, और उससे यह भी पूछा जाएगा कि उसने यह फर्जी दस्तावेज किससे तैयार करवाए थे।
अब सवाल यह उठता है कि अजहरुद्दीन को फर्जी दस्तावेज तैयार करने में किसने मदद की? पुलिस इस जांच को और विस्तार से ले जाने की योजना बना रही है और उम्मीद है कि अजहरुद्दीन के गिरफ्तार होने के बाद, फर्जी मार्कशीट बनाने वाले लोगों तक भी पहुंच बनाई जाएगी। बता दें, इस मामले में अब तक के खुलासे बेहद चौंकाने वाले हैं, लेकिन असली कहानी तो तब सामने आएगी जब पुलिस उसकी गिरफ्तारी के बाद उससे पूछताछ करेगी।